कुछ लम्हें

चाँद की बाहों मैं सिमटीसी

कुछ यादें

सितारों के दामन से लिपटीसी

रात के सन्नाटे मैं उलझी सी

कुछ बातें

दिल से निकलकर लबो तक रुकी सी

अधूरे ख्वाबों के एहसास किसीके हैं

कुछ ख़ास

तडपने के अंदाज़ ख़ुदा क़े बेमिसाल हैं   

रात के अंधियारे लम्बी कतार से हैं

कुछ वक़्त

उधार का अहसान किसीके फ़साने हैं

साँसो के दिये ओस की बूंद से महेकेसे 

कुछ पल

मयखाने  मैं सजी ख़ाली प्याले से

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